Cheque bounce case, accused fined Rs 48 lakh and sentenced to 2 years in jail, had taken a loan of Rs 25 lakh.
Cheque bounce case, accused fined Rs 48 lakh and sentenced to 2 years in jail, had taken a loan of Rs 25 lakh.

चेक बाउंस का मामला, आरोपी को 48 लाख रुपए जुर्माना और 2 साल की जेल,25 लख रुपए का लिया था लोन।

चेक बाउंस का मामला, आरोपी को 48 लाख रुपए जुर्माना और 2 साल की जेल,25 लख रुपए का लिया था लोन।

हाल ही में हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी से एक मामला सामने आया है जहां पर मंडी की अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाया है। फैसले में मुख्य न्यायाधीश दंडाधिकारी की अदालत ने आरोपी रमेश आर्य को दोषी करार देते हुए 2 साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही में अदालत में शिकायतकर्ता कंपनी को हुए नुकसान की भरपाई के लिए 48 लाख रुपए का जुर्माना देने का भी आदेश दिया है।

आरोपी ने 25 लख रुपए का लिया था लोन

वहीं पर आपको बता दे कि यह मामला जो है यह श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड और रमेश आर्य के बीच हुए एक वाहन लोन से जुड़ा है वहीं पर बताया जा रहा है कि रमेश आर्य ने 16 अक्टूबर 2012 को एक महिंद्रा अर्थ मास्टर जेसीबी मशीन खरीदने के लिए कंपनी से 25 लाख 98 हजार 80 रुपए का लोन लिया था। और वहीं पर रमेश ने 30 दिसंबर 2013 को 24 लख रुपए का एक चेक जारी किया और बताया जा रहा है कि जब कंपनी ने इस चेक को बैंक में लगाया तो यह खाते में पर्याप्त राशि ना होने के कारण बाउंस हो गया। फिर इसके बाद कंपनी के द्वारा रमेश आर्य को 13 जनवरी 2014 को कानूनी नोटिस भेजा जाता है लेकिन उसके द्वारा कोई जवाब नहीं दिया जाता है जवाब न दिए जाने के कारण धारा 138 के तहत मामला दर्ज करवा दिया जाता है

अदालत ने किया आरोपी के तर्कों को खारिज

और बाद में जब यह मामला अदालत में गया तो अदालत ने आरोपी की तरफ से लगाए गए जितने भी तर्क थे जो उसके बचाव के लिए थे अदालत ने उन सभी तर्कों को खारिज कर दिया। और इसके बाद आरोपी कहता है कि चेक पर उसके हस्ताक्षर नहीं थे तो इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर चेक पर उसके हस्ताक्षर नहीं थे तो क्या उसने हस्ताक्षरों को मिलने के लिए कोई आवेदन दिया था। और वहीं पर आपको बता दे की बैंक ने हस्ताक्षर गलत होने के कारण चेक को बाउंस नहीं किया था बल्कि उसे खाते में एक भी रुपया नहीं था इसलिए चेक को बाउंस किया गया था

कोर्ट का नोटिस आने पर भी नहीं दिया था जवाब

फिर इसके बाद आरोपी रमेश आर्य यह तर्क देते हैं कि वह कंपनी का कर्मचारी था और चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था लेकिन इसके बाद अदालत ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया क्योंकि उसने कोई भी वेतन पर्ची अदालत में पेश नहीं की। इसके बाद कोर्ट ने यह कहा की आरोपी को कानूनी नोटिस पर्ची मिलने के बाद भी उसने कोई कार्यवाही नहीं की थी ना ही उसने उसका कोई जवाब दिया। वहीं पर कानून का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति निर्दोष होता है तो उसे अगर कानूनी नोटिस मिल जाता है तो वह तुरंत अपनी स्थिति स्पष्ट करता है ना कि चुप रहता है।

2 साल की जेल 48 लख रुपए जुर्माना

वहीं पर अदालत ने आरोपी रमेश आर्य को सजा सुनाते हुए कहा की 2 साल की साधारण कैद और 24 लख रुपए चेक राशि और उस पर 9% की दर से ब्याज जोड़कर कल 48 लख रुपए का जुर्माना सुनाया और वहीं पर यह भी कहा कि यदि आरोपी मुआवजे की राशि नहीं चुका पाता है तो उसे 6 महीने की अतिरिक्त कैद काटनी होगी।

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